मेरा हिंदुस्तान

मेरा हिंदुस्तान
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चारों तरफ बज रही,
 प्रेम की शहनाई थी।
निहत्थे सुप्त सैनिकों पर ,
जिसने गोली बरसायी थी।
प्रेम दिवस को जिसने,
शोक दिवस बनाया था।
खिलखिलाते आँगन को,
 लहूलुहान जिसने किया ।
भारत माता की कोख को,
जिसने सूना कर दिया।
मेरी रंगीन दुनियाँ को ,
जिसने रंगहीन बनाया ।
माँ भारती के आरती में,
जान देकर अपना तन,
तिरंगे मे लिपटाया।
और बचाया तिरंगे का मान।
ऐसे अमर वीरों को ,
मेरा शत्‌ -शत्‌ प्रणाम।
तब माँ भारती के बेटों ने ,
अपना रंग दिखाया।
दुश्मन के आँगन में जाकर,
तांडव नृत्य रचाया।
26 फरवरी मंगलवार का दिन था,
हनुमान बन कर उसकी लंका में,
आग लगाने हनुमान बनकर आया ।
थर्राने लगा दुश्मन,
और युद्ध विराम फ़रमाया।
हमने तेरे चरणों की,
हे!माँ ले ली है कसम।
जान से प्यारा है,
मेरा महबूब वतन।
जो काम शहीदों के रह गए अधूरे।
उस काम को माँ हम करेंगे पूरे।
40 सिर के बदले हम,
असंख्य मुंड काटकर लायेंगे।
धारण कर चूड़ी और सिंदूर,
रणचंडी बन कर जायेंगे।
खींच कर दुश्मन को घर से ,
सीने पर गोली मार गिराएंगे।
तब रोज़ हम प्रेम और खुशी
 का त्योहार मनायेंगे।
मेरा महबूब सनम मेरा हिंदुस्तान है।
मेरा वेलेन्टाइन,
मेरा अमर वीर जवान है।
वीरो ! तुझको मेरा सलाम।
भारत के वीर सपूतो!
तुझको,शत्‌ -शत्‌ प्रणाम ।
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एकता कुमारी,घनुआँ,
खेसर (बाँका ),बिहार।

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